एकविवाही सम्बन्ध और समान नागरिक संहिता

नृवंशविज्ञान के एटलस कोडबुक के अनुसार, १२३१ सूचीबद्ध समाजों में से केवल १५% समाज एकविवाही होते हैं. अगर आप पैतृक पहुँच या संसाधन जुटाव के दृष्टिकोण से चीज़ों को देखते हैं, तब एकविवाही समाज के लाभ दिखाई पड़ते हैं. हालाँकि यह भी देखा जाता है की संयुक्त राष्ट्र अमरीका के १५% महिलायें और २५% पुरुष विवाहेतर संबंधों में लिप्त हैं. यह संख्या वास्तविकता से काम है. इसका कारण यह है की लोगो में विवाहेतर संबंधों को नकारने की संभावना ज्यादा है. इसका मतलब यह भी है की परिवार की सुख शान्ति और निजी यौन आवश्यकता उतने कसकर जुड़े हुए नहीं हैं, जितने प्रतीत होते हैं.

हार्वर्ड के ऍफ़ मार्लोव लिखते हैं :
“मैं हमारे संभोग प्रणाली पर पैतृक निवेश में विविधता के प्रभाव की जांच करने के लिए एक तुलनात्मक दृष्टिकोण का उपयोग करता हूं. मैंने निष्कर्ष निकाला है कि पैतृक निवेश महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ साथी-संरक्षण भी. संभोग प्रणाली में बदलाव पुरुष संसाधन नियंत्रण और योगदान में विविधता से समझाया गया है.
इससे पारिस्थितिक रूप से लगाए गए एकविवाही सम्बन्ध(मोनोगैमी) या बहुपत्‍नीत्‍व (पॉलीगनी) पैदा होते हैं; तथा पुरुष-पुरुष प्रतियोगिता में भिन्नता से सामाजिक रूप से लगाए गए एकविवाही सम्बन्ध या बहुपत्‍नीत्‍व पैदा होते हैं.”

इसका प्रमुख निष्कर्ष हैं: पैतृक निवेशों में बढ़ोतरी एकविवाही समाज को प्रतिमान बना रही है. हिल और कापलान यह भी कहते हैं कि,यदि महिला दो बार शादी करती है, एक बच्चे की मृत्यु की संभावना लगभग दोगुनी हो जाती है. माता-पिता के विवाह विच्छेद के मामले में यह संख्या लगभग 1.7 गुना हो जाती है.

बहुपत्नीक समाजों में पत्नियों की संख्या सामाजिक स्थिति का संकेत माना जाता है. ऐसे अभ्यास से हरेम की अवधारणा उभरी. पश्चिम के अलावा चीन, जापान और नेपाल जैसे एशियाई देशों ने बहुभुज(पोलीगमि) पर प्रतिबंध लगा दिया है. भारत में मुस्लिम व्यक्तिगत कानून इसका अपवाद हैं. एकविवाही सम्बन्ध के परिणामस्वरूप अविवाहित पुरुषों के संख्या में कटौती हुई और अपराध दर कम हो गई; जिससे बेहतर आर्थिक सफलता और मुक्त-चिंतन का संचार हुआ।

डेविड हेर्ली मानते हैं की लोकतांत्रिक सिद्धांतों की स्थापना में एकविवाही संबंधों का प्रमुख योगदान है. स्त्रियों के वस्तुकरण से संसाधनिक बहुपत्‍नीत्‍व समाज में पैदा हुई. बहुपतित्व दुर्लभ है, लेकिन मुख्य रूप से पारिस्थितिक कारणों से उत्पन्न होती है, जब परिवार में कई पुरुष एक ही महिला से यौन संपर्क चाहते हैं। इसका उदहारण तिब्बत या नेपाल में देखने को मिलता है. निरंकुशतावाद, बहुभुज सम्बन्ध तथा विषम प्रजनन सफलता दर में परस्पर सम्बन्ध है.

एक विवाह का समर्थन धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि इसलिए करना चाहिए क्योंकि एक विवाह ने महिलाओं के मुक्ति की ओर अग्रसर किया है, और साथ ही समता के साथ समृद्ध समाज को ओर भी प्रेरित किया है। 21 वीं सदी में भारत में, मुस्लिम पुरुषों में एक से ज्यादा पत्नी रखने की अनुमति देने का यह भयानक अभ्यास गलत है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन निरंकुश कानूनों ने महिलाओं को एक वस्तु तक सीमित होने पर मजबूर कर दिया है.

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